Bhojpuri24.com की विशेष शृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय ई० (डॉ०) दिनेश प्रसाद सिन्हा का, जिन्होंने साहित्य, पत्रकारिता, सिनेमा और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी और भोजपुरी भाषा के विकास में योगदान दिया है। कविता, कहानी, गीत, संस्मरण और समसामयिक लेखन से जुड़े डॉ. सिन्हा का व्यक्तित्व तकनीकी शिक्षा, साहित्यिक अभिरुचि और संगठनात्मक अनुभव का संगम है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में भी उनकी सक्रियता उल्लेखनीय रही है।
वैशाली की मिट्टी में जन्म, तकनीकी शिक्षा के साथ साहित्य से जुड़ाव
ई० (डॉ०) दिनेश प्रसाद सिन्हा का जन्म 11 मई को बिहार के वैशाली जिले के भगवानपुररत्ती गांव में हुआ। उनकी माता स्वर्गीय एमएस देवी और पिता स्वर्गीय ब्रह्मानंद सिन्हा थे। उन्होंने ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में स्नातक, पी.जी.डी.सी.ए., हिंदी में स्नातकोत्तर और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उनका जुड़ाव साहित्य और भाषा के प्रति लगातार बना रहा। हिंदी, भोजपुरी और लोकभाषाओं के संरक्षण तथा साहित्य सृजन में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए काशी हिंदी विद्यापीठ, वाराणसी ने उन्हें ‘विद्या-वाचस्पति’ की मानद पी-एच.डी. उपाधि से सम्मानित किया।
1984 में पहली कविता के प्रकाशन से शुरू हुई साहित्यिक यात्रा
डॉ. सिन्हा की पहली कविता का प्रकाशन वर्ष 1984 में हुआ। इसके बाद उनकी रचनाएं देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहीं। साहित्य के प्रति उनकी रुचि कविता तक सीमित नहीं रही। वे समाचार पत्रों में समसामयिक विषयों पर नियमित आलेख भी लिखते रहे हैं। हिंदी और भोजपुरी में उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘‘माइके लाज रखी’ (भोजपुरी कविता-संग्रह), ‘झरिया की यादें’ (संस्मरण), ‘तितकी खोजेला’ (भोजपुरी कविता-संग्रह), ‘बिखरे रिश्ते 1’, ‘बिखरे रिश्ते 2’, ‘बिखरे रिश्ते 3’, ‘बिखरे पन्ने’ मेरी 30 कविताएँ’ (हिंदी कविता-संग्रह), ‘कोयला का आँचल’ (हिंदी कहानी-संग्रह), और ‘विश्व पटल पर भोजपुरी के अग्रदूत’ प्रमुख हैं। इन पुस्तकों से उनकी साहित्यिक सक्रियता और हिंदी-भोजपुरी दोनों भाषाओं के प्रति प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है।

पत्रकारिता, संपादन और सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान
साहित्य के साथ-साथ डॉ. सिन्हा पत्रकारिता, संपादन और सिनेमा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। वे दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में संपादन और सहायक संपादन का कार्य कर चुके हैं। उन्होंने तीन भोजपुरी फिल्मों में गीत लिखे और चार धारावाहिकों में सहायक गीतकार के रूप में काम किया। दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों से उनके काव्य-पाठ और व्याख्यान समय-समय पर प्रसारित होते रहे हैं। उनकी रचनात्मक गतिविधियां पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं से आगे बढ़कर प्रसारण तथा दृश्य माध्यमों तक पहुंची हैं। इससे साहित्य और जनसंचार के विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुभव का विस्तार दिखाई देता है।
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में निभाईं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
डॉ. सिन्हा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न संस्थाओं, संगठनों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वे ‘इंड टीवी बिहार’ में एडिटर-इन-चीफ, ‘ग्राविस बिहार’ में सचिव, ‘बिझरौली सेवा संघ’ में अध्यक्ष, ‘भोजपुरी अकादमी’ में अंतरराष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर, ‘महात्मा गांधी विचार मंच – साउथ अफ्रीका’ में कोऑर्डिनेटर, ‘बिहार हिंदी अकादमी’ में सदस्य तथा ‘भारत–अफ्रीका हिंदी–भोजपुरी सहयोग समिति’ में सचिव रहे हैं। व्यावसायिक क्षेत्र में वे ‘एन.आई.सी.एल.’ से जुड़े रहे तथा ‘टेल्नोटिका लिमिटेड – नाइजीरिया’ में निदेशक और ‘भारत साई टेलीकॉम – मलावी, अफ्रीका’ में प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनकी यह यात्रा तकनीकी, व्यावसायिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों के बीच उनके व्यापक अनुभव को दर्शाती है।
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19 देशों की साहित्यिक यात्रा और अनेक प्रतिष्ठित सम्मान
डॉ. सिन्हा को 19 देशों में साहित्यिक यात्रा करने और नौ अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में भाग लेने का अवसर मिला है। उन्हें महामहिम राष्ट्रपति महोदय का स्वागत-गान से अभिनंदन करने का गौरव भी प्राप्त है। मलावी के उच्चायुक्त ने उन्हें तीन बार सम्मानित किया है। उनके प्रमुख सम्मानों में बिहार विधान परिषद से वर्ष 2018 में प्राप्त सम्मान, ‘हिंदी सोसायटी सिंगापुर अवॉर्ड’, ‘वातायन इंटरनेशनल अवॉर्ड’ (लंदन), नेपाल भोजपुरी फाउंडेशन द्वारा ‘आचार्य गौरी शंकर पाण्डेय अंतर्राष्ट्रीय वाङ्मय सम्मान’, ‘दिनकर खोज पुरस्कार’, ‘राजभाषा पुरस्कार’, ‘साहित्य विभूषण’ और राम जानकी ट्रस्ट का ‘रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान’ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें विश्व हिंदी परिषद (कोलकाता), भारतीय पुरातत्व विभाग (कोलकाता), उत्तर बिहार हिंदी-भोजपुरी महासंघ, लिच्छवी वैशाली साहित्य मंच तथा भोजपुरी विकास मंच सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्मान प्राप्त हुए हैं।

भोजपुरी के वैश्विक प्रसार के लिए समर्पित बहुआयामी व्यक्तित्व
डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा की पहचान केवल साहित्यकार के रूप में नहीं, बल्कि पत्रकार, संपादक, गीतकार और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े सक्रिय व्यक्तित्व के रूप में भी है। हिंदी और भोजपुरी में साहित्य सृजन, फिल्मों के लिए गीत लेखन, पत्र-पत्रिकाओं का संपादन, विभिन्न संस्थाओं में जिम्मेदारियों का निर्वहन और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक यात्राएं उनके व्यापक अनुभव को रेखांकित करती हैं। उनकी पुस्तक ‘विश्व पटल पर भोजपुरी के अग्रदूत’ भी भोजपुरी भाषा की पहचान और उसके साहित्यिक योगदान से जुड़े विषयों के प्रति उनकी रुचि को दर्शाती है। तकनीकी शिक्षा से शुरुआत कर साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों तक पहुंची उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि भाषा और संस्कृति के लिए योगदान कई अलग-अलग माध्यमों से किया जा सकता है।
Bhojpuri24.com की विशेष शृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा का परिचय भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा उसके व्यापक प्रसार के लिए समर्पित एक बहुआयामी व्यक्तित्व की यात्रा को सामने लाता है।




