बाढ़ से पहिले कागज पर पुल बन जाता, कइसन-कइसन खेला होता

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ग़ज़ल-मनोज भावुक

भइलें नेता चोर उचक्का थू थू थू
लोकतंत्र के कइलें कचरा थू थू थू

चुन के भेजनी जा संसद में जेकरा के
ऊहो निकलल खोटा सिक्का, थू थू थू

भ्रष्टाचार के बाढ़ में का नइखे डूबल
करियर, बिजनेस, सेहत, शिक्षा, थू थू थू

बाढ़ से पहिले कागज पर पुल बन जाता
कइसन-कइसन खेला होता, थू थू थू

जे विरोध में बोली ऊ लाठी खाई
अइसन बा उन्मादी सत्ता, थू थू थू

जंतर-मंतर पर होता हुलेलेले
कुर्सी खातिर गजब तमाशा, थू थू थू

फंड विदेशी लेके नाचत बा जे गैंग
लोकतंत्र पर बाटे खतरा, थू थू थू

लइकन के साथे कुछ पाखंडी बुढओ
कइलें बाड़ें ही ही हा हा थू थू थू

नइखन जानत ई प्रोटेस्ट होता काहे
भीड़ में बाड़ें गदहो, पाड़ा, थू-थू-थू

सुननी ह, अच्छा दिन आइल बा अइसन
बीच सड़क पs लाज लुटाता, थू थू थू

एह से बढ़के अउरी थू थू का होई
बोलत बाड़ें लइको-फइका थू थू थू

घर में हरदम चैन-सुकून रहे ‘भावुक’
ना चाहीं लफड़ा कवनो ना थू थू थू

परिचय – मनोज भावुक प्रख्यात भोजपुरी साहित्यकार, ग़ज़लकार, फिल्म-गीतकार, संपादक और सिनेमा इतिहासकार हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं – तस्वीर ज़िंदगी के, चलनी में पानी और भोजपुरी सिनेमा के संसार। लोकप्रिय पत्रिका ‘ भोजपुरी जंक्शन ‘ के संपादक मनोज भावुक अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों पर प्रहार करने तथा भोजपुरी भाषा-साहित्य और सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जाने जाते हैं।

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