फूहड़ भोजपुरी गीतों पर बिहार सरकार का शिकंजा, सार्वजनिक स्थलों पर बजाने पर होगी कार्रवाई

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Bhojpuri24.com भी भोजपुरी में फूहड़ता के खिलाफ है, हमारा उद्देश्य अपनी प्यारी मातृभाषा को अधिक समृद्ध बनाना है

पटना। भोजपुरी भाषा और लोकसंस्कृति की गरिमा को लेकर लंबे समय से उठ रही चिंताओं के बीच बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सार्वजनिक स्थलों, विवाह समारोहों, बाजारों, बसों, ऑटो और अन्य वाहनों में अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक भोजपुरी गीत बजाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने गृह विभाग को पत्र लिखकर ऐसे गीतों के प्रसारण पर प्रभावी रोक लगाने की अनुशंसा की है।

सरकार का कहना है कि भोजपुरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को फूहड़ और आपत्तिजनक गीतों से नुकसान पहुंच रहा है। विभाग ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।

महिलाओं और बच्चों पर असर को बताया प्रमुख कारण

कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर बजने वाले अश्लील और द्विअर्थी गीत सामाजिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे गीत महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं और बच्चों व युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

इससे पहले भी बिहार सरकार सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील और डबल मीनिंग गीतों के खिलाफ अभियान चलाने की घोषणा कर चुकी है। गृह विभाग की ओर से पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।

वर्षों से उठती रही है मांग

फूहड़ भोजपुरी गीतों पर रोक की मांग नई नहीं है। वर्ष 2023 में बिहार विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया था और जनप्रतिनिधियों ने अश्लील तथा द्विअर्थी गीतों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी। बाद में सरकार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

भोजपुरी समाज में लंबे समय से चल रही बहस

भोजपुरी भाषा के साहित्यकार, लोक कलाकार और सांस्कृतिक संगठन वर्षों से यह सवाल उठाते रहे हैं कि कुछ फूहड़ गीतों के कारण पूरी भोजपुरी भाषा की छवि प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर लोकगायकों और सांस्कृतिक कर्मियों का एक वर्ग मानता है कि भोजपुरी की पहचान उसके लोकगीतों, बिरहा, कजरी, सोहर, चैता, निर्गुण और सांस्कृतिक परंपराओं से है, न कि अश्लीलता से।

भोजपुरी के लिए अवसर भी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार का यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू होता है तो भोजपुरी संगीत उद्योग में साफ-सुथरे, पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों वाले गीतों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे भोजपुरी भाषा की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान बनाने में भी मदद मिलेगी।

भोजपुरी की समृद्ध लोकधारा में भिखारी ठाकुर, महेंद्र मिश्र, रघुवीर नारायण और सुंदर पोपो जैसे रचनाकारों की परंपरा रही है। ऐसे में सांस्कृतिक जगत के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह पहल भोजपुरी संगीत को उसकी मूल सांस्कृतिक पहचान की ओर लौटाने में सहायक साबित होगी।

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