‘कहे तोसे सजना’ से चमकी सलमान की किस्मत, शारदा सिन्हा ने दी थी आवाज

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मुंबई/पटना। भोजपुरी और मैथिली लोकसंगीत की स्वर साम्राज्ञी शारदा सिन्हा का चर्चित गीत ‘कहे तोसे सजना’ एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 1989 में रिलीज हुई सलमान खान और भाग्यश्री अभिनीत सुपरहिट फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का यह गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गीत शारदा सिन्हा का बॉलीवुड में गाया गया पहला फिल्मी गीत था।

बिहार की मिट्टी से निकली शारदा सिन्हा ने अपनी लोकगायकी के दम पर पूरे देश में पहचान बनाई। छठ गीतों, विवाह गीतों और लोकधुनों को नई ऊंचाई देने वाली शारदा सिन्हा की आवाज में गाया गया ‘कहे तोसे सजना’ उस दौर में बेहद लोकप्रिय हुआ था। फिल्म में यह गीत भाग्यश्री पर फिल्माया गया था और इसकी सादगी तथा लोकसंगीत की मिठास ने दर्शकों का दिल जीत लिया था।

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कहा जाता है कि राजश्री प्रोडक्शंस के संस्थापक ताराचंद बड़जात्या शारदा सिन्हा के लोकगीतों से काफी प्रभावित थे। उनकी गायकी से प्रभावित होकर ही उन्हें ‘मैंने प्यार किया’ में गाने का अवसर मिला। यह गीत न केवल शारदा सिन्हा के फिल्मी सफर की शुरुआत बना, बल्कि भोजपुरी और मैथिली लोकधुनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम भी बना।

भोजपुरी लोकधुन से सजा सलमान खान का कल्ट लव सॉन्ग

फिल्म मैंने प्यार किया (1989) का लोकप्रिय गीत ‘कहे तोसे सजना’ 37 साल बाद भी श्रोताओं के दिलों में बसा हुआ है। खास बात यह है कि यह सलमान खान की डेब्यू फिल्म थी और इसी फिल्म से बिहार कोकिला शारदा सिन्हा ने भी बॉलीवुड में गायन की शुरुआत की थी। भोजपुरी रंग में रंगा यह गीत अपनी मधुर धुन और भावपूर्ण बोलों के कारण आज भी बॉलीवुड के कल्ट लव सॉन्ग्स में गिना जाता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि इस गीत के लिए शारदा सिन्हा को मात्र 56 रुपये पारिश्रमिक मिला था, जबकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड सफलता हासिल की थी।

‘बाबुल’ ने भी बनाया अमर

शारदा सिन्हा का योगदान केवल ‘कहे तोसे सजना’ तक सीमित नहीं है। वर्ष 1994 में आई राजश्री प्रोडक्शंस की सुपरहिट फिल्म ‘हम आपके हैं कौन..!’ में उन्होंने ‘बाबुल जो तुमने सिखाया’ गीत को अपनी भावपूर्ण आवाज दी। यह गीत बेटी की विदाई की भावनाओं को इतनी मार्मिकता से प्रस्तुत करता है कि आज भी भारतीय शादियों में विदाई के समय सबसे अधिक बजाए और सुने जाने वाले गीतों में शामिल है।

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‘बाबुल जो तुमने सिखाया’ ने शारदा सिन्हा को घर-घर में नई पहचान दिलाई। इस गीत में भारतीय परिवार, संस्कार और बेटी-बाबुल के रिश्ते की संवेदनाओं को जिस तरह स्वर मिले, वह इसे सदाबहार गीतों की श्रेणी में खड़ा करता है। आज भी किसी बेटी की विदाई की कल्पना इस गीत के बिना अधूरी लगती है।

लोकसंगीत को बॉलीवुड तक पहुंचाने वाली आवाज

शारदा सिन्हा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने लोकसंगीत की आत्मा को बरकरार रखते हुए उसे मुख्यधारा के सिनेमा तक पहुंचाया। ‘कहे तोसे सजना’ और ‘बाबुल जो तुमने सिखाया’ जैसे गीतों ने यह साबित किया कि भारतीय लोकधुनों की मिठास किसी भी दौर में अपनी प्रासंगिकता नहीं खोती।

उनके गीतों ने भोजपुरी, मैथिली और मगही संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि उन्हें केवल एक गायिका नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति की संवाहक के रूप में भी याद किया जाता है।

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