1969 में त्रिनिदाद के प्रसिद्ध गायक सुंदर पोपो ने इसे आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ।
मुंबई। भोजपुरी लोकसंगीत की ताकत एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रही है। करीब 57 वर्ष पुराना लोकप्रिय भोजपुरी लोकगीत ‘फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी’ इन दिनों फिर चर्चा में है। अजय देवगन, रितेश देशमुख और अरशद वारसी अभिनीत फिल्म ‘धमाल 4’ के ट्रेलर में इस गीत की झलक दिखाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी लोकप्रियता अचानक बढ़ गई है।
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फिल्म के ट्रेलर में इस लोकधुन का इस्तेमाल दर्शकों को खासा आकर्षित कर रहा है। मनोरंजन जगत के जानकारों का मानना है कि यह गीत भोजपुरी संस्कृति की उस विरासत का हिस्सा है, जिसने पीढ़ियों तक अपनी पहचान बनाए रखी है।
भोजपुरी से कैरेबियन तक का सफर
‘फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी’ मूल रूप से भोजपुरी लोक परंपरा से जुड़ा गीत है। यह गीत गिरमिटिया मजदूरों के साथ कैरेबियाई देशों तक पहुंचा और वहां ‘चटनी म्यूजिक’ शैली का आधार बना। 1969 में त्रिनिदाद के प्रसिद्ध गायक सुंदर पोपो ने इसे आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ।
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पहले भी बॉलीवुड में गूंज चुका है गीत
यह पहली बार नहीं है जब इस लोकगीत ने बॉलीवुड का ध्यान खींचा हो। इससे पहले भी इसके विभिन्न संस्करण हिंदी फिल्मों और एल्बमों में सुनाई दे चुके हैं। सलमान खान की फिल्म ‘दबंग 2’ में भी इस धुन का रूपांतरण इस्तेमाल किया गया था।
‘धमाल 4’ से मिली नई पीढ़ी को पहचान
‘धमाल 4’ के ट्रेलर में इस गीत के प्रयोग ने नई पीढ़ी के दर्शकों को भोजपुरी लोकसंगीत से जोड़ने का काम किया है। ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर गीत के पुराने संस्करणों की खोज और शेयरिंग बढ़ गई है। फिल्म 10 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
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भोजपुरी संस्कृति की नई जीत
संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि ‘फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी’ की वापसी यह साबित करती है कि भोजपुरी लोकधुनें केवल क्षेत्रीय पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें वैश्विक स्तर पर लोगों को जोड़ने की क्षमता है। एक बार फिर भोजपुरी की मिट्टी से निकला यह गीत देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।


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