1845 से 1917 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप से करीब 1.43 लाख मजदूर त्रिनिदाद पहुंचे थे। इनमें अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश और बिहार (खासकर भोजपुरी क्षेत्रों) से थे। आज उनकी पांचवीं और छठी पीढ़ी त्रिनिदाद और टोबैगो की कुल आबादी का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो दौरे के दौरान भारतीय मूल के लोगों, खासकर गिरमिटिया समुदाय, के साथ भारत के रिश्तों को और मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिन प्रवासी भारतीयों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, भारत सरकार उन्हें ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड दिलाने में मदद करेगी।
त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि OCI योजना को लेकर भारतीय मूल के लोगों में लगातार रुचि बढ़ रही है और बड़ी संख्या में आवेदन भारतीय उच्चायोग को मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दस्तावेजों की कमी के कारण किसी पात्र व्यक्ति को परेशानी नहीं होने दी जाएगी और भारत सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।
दौरे के दौरान जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के साथ ऐतिहासिक नेल्सन द्वीप का दौरा भी किया। यही वह स्थान है, जहां लगभग 180 वर्ष पहले गिरमिटिया भारतीय पहली बार पहुंचे थे। विदेश मंत्री ने उन भारतीय मजदूरों के संघर्ष, साहस और संकल्प को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में नई पहचान बनाई।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय प्रवासी समुदाय की छठी पीढ़ी तक OCI कार्ड देने की घोषणा ने भारत और त्रिनिदाद के सांस्कृतिक तथा पारिवारिक संबंधों को नई मजबूती दी है। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भी कहा कि भारत की मदद से नेल्सन द्वीप पर शुरू की गई क्विक इम्पैक्ट परियोजना साझा विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पूर्वजों से जुड़ने में मदद करेगा अभिलेखीय समझौता
जयशंकर ने कहा कि भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच हुआ अभिलेखीय सहयोग समझौता भारतीय मूल के लोगों को अपनी पैतृक जड़ों की पहचान करने और भारत में अपने परिवारों से दोबारा जुड़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार गिरमिटिया समुदाय की विरासत को सहेजने के लिए लगातार काम कर रही है।
विदेश मंत्री के अनुसार, भारतीय प्रवासी अपने साथ भारतीय संस्कृति, परंपराएं और आस्था लेकर गए थे। ऐसे में इस इतिहास और विरासत को संरक्षित करना बेहद जरूरी है।
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भारत की सहायता से कई परियोजनाओं की शुरुआत
अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने कृषि प्रसंस्करण केंद्र और स्थायी कृत्रिम अंग केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के साथ भारत की ‘सीड्स’ पहल के तहत संचालित एग्रो-प्रोसेसिंग सुविधा का संयुक्त रूप से लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना लघु एवं मध्यम उद्योगों को मजबूती देने के साथ कृषि क्षेत्र को नई गति प्रदान करेगी।
पीएम मोदी ने 2025 में किया था बड़ा ऐलान
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा के दौरान वहां बसे भारतीय मूल के लोगों की छठी पीढ़ी तक OCI कार्ड देने की घोषणा की थी। इसे भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
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भारत-त्रिनिदाद के बीच 8 समझौते
जयशंकर की यात्रा के दौरान भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें पर्यटन सहयोग, विदेश मंत्रालय भवन को सौर ऊर्जा से संचालित करना, नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढांचे का विकास और यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज में आयुर्वेद पर भारतीय चेयर स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा जयशंकर ने स्कूली बच्चों के लिए 2,000 लैपटॉप की पहली खेप भी सौंपी।

