लोक रंग में सराबोर हुआ ‘भोजपुरी साहित्य सम्मेलन’, भाषा के विस्तार पर जोर

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बलिया। ‘भोजपुरी साहित्य सम्मेलन’ का वार्षिक अधिवेशन रविवार को शहर के कदम चौराहा स्थित बालखंडी नाथ मंदिर में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कृष्ण मिश्र की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद महेंद्र वर्मा के स्वागत गीत और डॉ. अरविंद उपाध्याय की भोजपुरी गीत प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को लोक-सांस्कृतिक रंग में रंग दिया और उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य अतिथि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भाषा में अपार संभावनाएं निहित हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भोजपुरी को डिजिटल प्लेटफॉर्म, शोध कार्यों और शिक्षा व्यवस्था में अधिक स्थान दिया जाए, ताकि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो सके।

विशिष्ट अतिथि डॉ. शिवानुग्रह नारायण सिंह ने भोजपुरी भाषा के मानकीकरण, व्याकरण और शब्दकोश निर्माण पर गंभीर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. प्रकाश तिवारी ने आधुनिक दौर में भोजपुरी साहित्य के नए आयाम विकसित करने की जरूरत बताई, जबकि डॉ. राजेश कुमार सिंह ‘श्रेष्ठ’ ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को भोजपुरी के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

जिला प्रोबेशन अधिकारी अमरेंद्र पौरुष्यम ने कहा कि भोजपुरी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे संरक्षित और विकसित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा और प्रशासनिक स्तर पर भोजपुरी के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में जनार्दन चतुर्वेदी ‘कल्याण’, शशि लता पाण्डेय, राम बदन राय, श्वेता पाण्डेय, सुशीला पाल और विजय मिश्रा ने अपनी-अपनी रचनाओं का प्रभावी पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। प्रस्तुत कविताओं में समाज, संस्कृति, लोकजीवन और समकालीन मुद्दों की सशक्त झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर जनार्दन चतुर्वेदी, मोहन, शैलेन्द्र मिश्र, राम बहादुर राय, देव कुमार सिंह, अशोक, शाल्म, विद्यालाल सिंह, विवेक सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार यादव ने किया, जबकि आभार डॉ. राजेन्द्र भारती ने व्यक्त किया।

भोजपुरी साहित्य सम्मेलन में राम बहादुर राय सम्मानित

इस कार्यक्रम में साहित्यकार राम बहादुर राय को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद राम बहादुर राय ने कहा कि अपने जिले में सम्मान मिलना बेहद गर्व की बात होती है। उन्होंने इस अवसर के लिए सम्मेलन के पदाधिकारियों एवं उपस्थित सभी साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. राजेन्द्र भारती और सुनील कुमार यादव का धन्यवाद देते हुए कहा कि यह उनके लिए खास क्षण है, क्योंकि उन्हें पहली बार अपने ‘बागी बलिया’ की धरती पर सम्मानित होने का अवसर मिला है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भोजपुरिया साहित्यकार एवं समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। आयोजन में साहित्य और संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
राम बहादुर राय ने अंत में सभी के प्रति कृतज्ञता जताते हुए ‘जय भोजपुरी’ का उद्घोष किया।

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