Tag: भोजपुरी पुस्तक समीक्षा

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‘एकलव्य’ :गुरु-शिष्य परंपरा, सामाजिक समरसता और दलित चेतना का विशेष काव्य दस्तावेज

हालिया सन्दर्भ: प्रसिद्ध पब्लिशिंग हाउस ‘सेज’ (SAGE) से डॉ. गोरख प्रसाद ‘मस्ताना’ की पुस्तक ‘एकलव्य’ पर आधारित डॉ. दीपक कश्यप का शोध-आलेख ‘Sociology of...

‘सँउसे चान आकासे’ भोजपुरी लोकजीवन, मातृभाषा और संवेदनाओं का उज्ज्वल काव्य-संसार

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया 'सँउसे चान आकासे' भोजपुरी की चर्चित कवयित्री डॉ. वीणा पाण्डेय 'भारती' का पहला भोजपुरी काव्य-संग्रह है। इसका प्रकाशन जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद्...

भोजपुरी कविता की संवेदना, सौंदर्यशीलता और आलोचना-दृष्टि का प्रामाणिक दस्तावेज है -‘भोजपुरी कविता : रुचि आ रचाव’

समीक्षक : सूर्यदेव पाठक 'पराग' भोजपुरी साहित्य में सृजनात्मक विधाओं के समानान्तर आलोचना और समीक्षा- लेखन की परंपरा अपेक्षाकृत कम विकसित रही है। ऐसे समय...

नारी संवेदना, सामाजिक यथार्थ और संघर्ष का दस्तावेज है डॉ. संध्या सिन्हा का कहानी संग्रह ‘जिनगी के धाह, जीये के चाह’

समीक्षा : राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा में कथा विधा हमेशा से समाज के जीवन, संघर्ष, संस्कार और संवेदनाओं का सजीव दस्तावेज...

भोजपुरी कविता की विकास यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’

समीक्षक- राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य के इतिहास पर गंभीर और शोधपरक कार्य अपेक्षाकृत कम हुए हैं। ऐसे समय में ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ जैसी...

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