Tag: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा

Browse our exclusive articles!

Now Is the Time to Think About Your Small-Business Success

Find people with high expectations and a low tolerance...

लोकजीवन, लोकसंवेदना और बदलते गाँव की पीड़ा का काव्य-दस्तावेज : ‘नेह के थुन्हीं-टाटी हऽ गाँव’

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य भारतीय लोकजीवन की सांस्कृतिक स्मृतियों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त साहित्य है। इसकी रचनात्मक परंपरा...

Popular

‘बिगुल’ का पराग पर एकाग्र विशेषांक, भोजपुरी साहित्य के एक मनीषी का सार्थक पुनर्पाठ

समीक्षक : डॉ. सुनील कुमार पाठक साहित्यिक पत्रिकाओं के लगातार...

भोजपुरी पाठकों के लिए अनमोल कृति है भोजपुरी में श्रीमद्भगवद् गीता

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा...

‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

Subscribe

spot_imgspot_img