बिहार विकास खोजत बा ।।
सम्राट चौधरी बनलन सेवक चौकीदार हो,
बिहार अब विकास खोजत बा।
खुलल पगड़ी जवन बान्हल रहे कपार हो,
बिहार अब विकास खोजत बा।
सुनत बानी दारू खुली फेरु से बिहार में,
चर्चा चलत बा सगरो गाँव आ जवार में,
झूमत बाड़न खुशियन से पियनिहार हो,
बिहार अब विकास खोजत बा।
जात- पात, भेद- भाव सभे पर सवार बा,
पिछड़ल बिहार खातिर नेता जिम्मेवार बा,
दीया बार के खोजे के बा इमानदार हो,
बिहार अब विकास खोजत बा।
अनपढ़- गँवार लोगवा करिहन नेतागिरी,
जनता के पिहन खूनवा, छाती दिहें चीरी,
“अजय” सभे ना होई नीतीश कुमार हो,
बिहार अब विकास खोजत बा।
कुमार अजय सिंह, गीतकार/कहानीकार
भोजपुर (आरा), बिहार

