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खाली किताब ना हऽ, छँनत मन के अंजोर हऽ ‘पढ़त-लिखत’

समीक्षक: निलय उपाध्याय आज सुनील कुमार पाठक जी से मुलाकात हुई और सुबह सुंदर हो गई। उनकी किताब मिली। किताब भोजपुरी में है और इसका...

‘गंगा रतन बिदेसी’ भोजपुरी उपन्यास में प्रवासी जीवन की पीड़ा

समीक्षक: प्रकाश प्रियांशु भोजपुरी साहित्य धारा में उपन्यास विधा अपेक्षाकृत नई है, लेकिन इसमें जीवन के गहरे अनुभवों को प्रस्तुत करने की क्षमता अद्भुत रही...

‘भोजपुरी के मान्यता देईं, ए सरकार’ : भाषा-अस्मिता, लोकचेतना और जनआंदोलन का काव्यात्मक दस्तावेज

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी की मान्यता की मांग को कविता का जनस्वर बनाता संग्रह भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता का सवाल केवल भाषा...

भोजपुरी में पढ़ाई जाएंगी कबीर की उलटबांसियां, नए सिलेबस में कबीर से पत्रकारिता तक

पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में भोजपुरी से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों के लिए नए सत्र से पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब...

भोजपुरी को कटघरे में खड़ा करने वाले अश्लीलता भाषा में है या नजर में?

प्रभात जी का यह कोई नया कथन नहीं है। अपनी बज्जिका का भाग्य जगाने के चक्कर में वे भोजपुरी को अपना सबसे बड़ा दुश्मन...

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