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Exclusive articles:

पीड़ा की विरह वेदना को अमर कर देता है बिरहा

वाराणसी के ठठेरी बाजार और चौखम्भा इलाके में श्रमिकों के बीच गया गया था पहला पटना/ गोरखपुर: रात का अंधेरा घना हो चुका है। कलकत्ता...

जुग जुग जियो ललनवा… सोहर

पटना: अंधेरी रात में अचानक एक नन्ही किलकारी गूंज उठती है। जच्चा की थकान भरी आँखों में खुशी की चमक आ जाती है। घर...

त्रेता युग से जुड़ा है चैता के तार

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में चैता (या चइता/चैती) सिर्फ एक मौसमी गीत नहीं बल्कि यह चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) की बसंत ऋतु, राम नवमी,...

गोदना, पति की याद, पहचान और सुरक्षा का प्रतीक

गोरखपुर/पटना: आज जब दुनिया 'मिनिमलिस्ट टैटू' की बात करती है, तब भोजपुरी गोदना याद दिलाता है कि भारत ने यह कला हजारों साल पहले...

भोजपुरी सिनेमा, लोक की आवाज से स्टारडम तक की यात्रा

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी सिनेमा भारतीय सिनेमा की उस शाखा का नाम है जो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिट्टी, भाषा और संस्कृति को...

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