अजीत दुबे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व भोजपुरी सम्मेलन
भोजपुरी केवल बोलचाल की भाषा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक पहचान और भावनात्मक...
समीक्षक : सूर्यदेव पाठक 'पराग'
भोजपुरी साहित्य में सृजनात्मक विधाओं के समानान्तर आलोचना और समीक्षा- लेखन की परंपरा अपेक्षाकृत कम विकसित रही है। ऐसे समय...
समीक्षा : राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर
भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा में कथा विधा हमेशा से समाज के जीवन, संघर्ष, संस्कार और संवेदनाओं का सजीव दस्तावेज...