लोकरंग- 2026 के पत्रिका विमोचन एवं सोहनी- रोपनी के गीतों से हुआ दो दिवसीय लोकरंग का आगाज
कुशीनगर: लोकरंग 2026 के लोकार्पण एवं मतिरानी देवी की टीम की सोहनी रोपनी के मनमोहक गीतों से देश के लब्धप्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन लोकरंग का शुभारंभ हुआ। सांस्कृतिक भड़ैती, फूहड़पन के विरुद्ध कुशीनगर जनपद के जोगिया जनूबी पट्टी स्थित कलाग्राम में 19 वें वर्ष के आयोजित दो दिवसीय लोकरंग के मंच पर देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों की प्रस्तुति ने लोक संस्कृतियों को जीवन्त कर दिया।
अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका लोकरंग 2026 का उद्घाटन देश के जाने-माने विद्वान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष देश हरियाणा पत्रिका के संपादक प्रोफेसर सुभाष चन्द्र सैनी ने करते हुए कहा कि आज ज्योति बा फुले का 200 वा जयंती है। ऐसे आयोजन को 19 वर्षों से हो रहा है, निश्चित ही आयोजकों का जुनून माना जायेगा। यह लोक कलाओं को ऊर्जा देने का मंच है यह हमारी विराट सांस्कृतिक और सभ्यता को संरक्षित करने का प्रयास है। आज भोजपुरी और लोककलाओं में फूहड़पन फैलाने का प्रयास हो रहा है उसको मूल परम्परा से जोड़ने का प्रयास है।

लोक संस्कृति हमको अपने संस्कृति और सभ्यता से जोड़ने का काम कर रही हैं। इसके लिए आयोजक बधाई के पात्र है। इसके बाद अतिथियों ने लोकरंग पत्रिका 2026 के लोकार्पण कर लोकरंग महोत्सव 2026 का औपचारिक शुभारंभ किया। गांव की महिलाएं मतिरानी देवी, सुशीला, चानमति, रुकसाना, ज्ञांति, और सुभागी ने अपनी रोपनी सोहनी गायन जो अब लुप्त अवस्था में है, जोतलो में पनिया रामा बो देहले ऊसर खेत से सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुरुआत कार्यकम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद बनारस के दुर्गेश उपाध्याय ने अपने साथियों के साथ पारंपरिक लोकगीत गणेश बंदना आव सुमिरना हमार हो गउरा के ललनवा तथा यात्रा गीत राम की सुधि आई आज मोरे राम की सुधि आई, रिमझीम रिमझिम देवा बरसे और और बहे चौवाई की प्रस्तुति से लोकरंग को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
बुन्देली सम्राट लोक कला संस्थान बिरधा ललितपुर की टीम ने जीतेंद्र कुमार के नेतृत्व में बुंदेली गायन और सैरा नृत्य प्रस्तुत कर बुंदेली लोक कलाओं को मानो जीवंत कर दिया कलाकारों के प्रस्तुति पर सभी दर्शक झूम उठे। कहानीबाज थियेटर सोसायटी रायगढ़ के कलाकार जोगेंद्र चौबे, निर्देशक मोहन सागर, रीतांक शर्मा, प्रेरणा देवांगन, गौरव मोरकर, परमानंद पाण्डेय, शैली यादव, प्रियंका, संस्कृति सिंह, आदि कलाकारों ने छत्तीसगढ के लोकनृत्य सुआ, करमा, ददरिया, पंथी और राउत नाचा की प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ी लोक कलाओं लोगों को परिचित कराने का काम किया। अगरतल्ला, त्रिपुरा की खुम्पुई कल्चरल एकेडमी द्वारा होजागिरी डांस की प्रस्तुति ने सबको रोमांचित कर दिया। इसके बाद बुंदेली लोक कला संस्थान ललितपुर बुंदेलखंड की टीम द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति ने सबको झूमने पर मजबूर कर दिया।

अंत में कहानीबाद सोसाइटी व जुड़ी नाट्य संस्था रायगढ़ छत्तीसगढ़ टीम ने मोहन सागर द्वारा निर्देशित व विवेक कुमार द्वारा रूपांतरित नाटक उल्लू पंचायत का मंचन गया यह नाटक व्यंग्य और एजे के समाज को आईना दिखाता है जिसमें पंचों स्वार्थ में आकर उल्लू के पक्ष ने गलत पंचायत सुनता है। इस नाटक में डॉ योगेंद्र चौबे, रविन्द्र चौबे, युवराज सिंह आजाद कल्याणी मुखर्जी, पोणेश्वरी सिंह, गौरव मोरकर, रीतांग शर्मा, तरुण बघेल आदि कलाकार भाग लिए। कार्यक्रम का संचालन रीवा विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो दिनेश कुशवाहा ने किया। वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर राय भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
कार्यक्रम के शुभारंभ के पहले इस आयोजन में भाग लेने पहुंचे कलाकारों और लोगों का आभार प्रकट करते हुए आयोजन समिति अध्यक्ष सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने दो दिनों तक चलने इसके इस महोत्सव का रूपरेखा बताया । जबकि गांव पहुंचे कलाकारों को आयोजन समिति के सदस्यों ने टीका और चन्दन लगाकर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ केपी कुशवाहा, डॉ किरन कुशवाहा, आशा कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।इस कार्यक्रम के आयोजन में विष्णुदेव राय, इजरायल अंसारी, भुनेश्वर राय, हदीश अंसारी, सिकन्दर गोंड, मंजूर अली, अनुभव राय, हबीब अंसारी, योगेन्द्र कुमार आदि लोगों का विशेष योगदान रहता है।

