रवि किशन का भोजपुरी तड़का, गीत-संवाद से साधे दिल और राजनीति दोनों

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कुशीनगर। बिहार की सीमा से सटे कुशीनगर के तमकुहीराज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा के दौरान गोरखपुर सांसद और भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता रवि किशन का अलग ही अंदाज देखने को मिला। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने भोजपुरी गीत “तकरार छिड़ल बा त तकरार छिड़ी…” गुनगुनाया और फिर स्थानीय बोली में लोगों से संवाद शुरू कर दिया। उनके इस अंदाज ने सभा को पूरी तरह भोजपुरी रंग में रंग दिया।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर में रवि किशन की मौजूदगी केवल एक सांसद की भागीदारी नहीं थी, बल्कि भोजपुरी भाषी मतदाताओं के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक सशक्त संदेश भी थी। रवि किशन ने मंच से कहा कि वह लंबे समय से तमकुहीराज आने की इच्छा रखते थे। उनके इस बयान ने क्षेत्र के लोगों के साथ उनके पुराने संबंधों की याद भी ताजा कर दी। कुशीनगर में उनकी चर्चित भोजपुरी फिल्म ‘प्रीत न जाने रीत’ की शूटिंग हो चुकी है, जिसके कारण यहां के लोगों के साथ उनका विशेष आत्मीय रिश्ता माना जाता है।

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योगी के साथ पहुंचे रवि किशन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दौरे पर रवि किशन को साथ लेकर पहुंचे। मंच पर उन्हें प्रमुख भूमिका दी गई, जिससे यह संकेत भी मिला कि भाजपा पूर्वांचल में विकास के साथ-साथ भोजपुरी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान को भी अपने राजनीतिक संवाद का हिस्सा बना रही है।

भोजपुरी में संवाद, फिल्मी अंदाज में हमला

अपने संबोधन के दौरान रवि किशन ने भोजपुरी और हिंदी के मिश्रण में भाषण दिया। उन्होंने समाजवादी पार्टी और उसके पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नारे पर निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे उठाए। उनका भाषण राजनीतिक हमलों के साथ-साथ फिल्मी अंदाज और भोजपुरी शैली के कारण लोगों का ध्यान खींचता रहा।

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गीत से बढ़ाया उत्साह

सभा का सबसे आकर्षक क्षण तब आया जब रवि किशन ने भोजपुरी गीत गाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। स्थानीय भाषा में संवाद और गीतों ने भीड़ के बीच अलग ही उत्साह पैदा कर दिया। लोग लगातार तालियां बजाते और उनका समर्थन करते दिखाई दिए।

भोजपुरी पहचान पर भाजपा का फोकस

तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र भोजपुरी भाषी आबादी वाला इलाका है और बिहार की सीमा से सटा होने के कारण यहां भोजपुरी संस्कृति का गहरा प्रभाव है। ऐसे में रवि किशन जैसे लोकप्रिय भोजपुरी चेहरे को मंच पर आगे रखकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह क्षेत्रीय भाषा और सांस्कृतिक भावनाओं को भी महत्व देती है।

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राजनीतिक संदेश से ज्यादा सांस्कृतिक जुड़ाव

तमकुहीराज की यह सभा केवल सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रही। मंच पर भोजपुरी गीत, स्थानीय बोली और सांस्कृतिक संदर्भों ने इसे एक अलग पहचान दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी चुनौतियों के बीच भाजपा विकास के साथ-साथ भोजपुरी गौरव और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी अपने चुनावी संदेश का अहम हिस्सा बना रही है। रवि किशन की प्रस्तुति इसी रणनीति की झलक मानी जा रही है।

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