मुंबई। मशहूर गायिका रेखा भारद्वाज ने भोजपुरी लोक संगीत की गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका मानना है कि भोजपुरी लोक संगीत को लंबे समय से हल्के और हास्यात्मक अंदाज में पेश किया जाता रहा है, जबकि इसकी परंपरा बेहद समृद्ध और सम्मानजनक है।
हाल ही में रिलीज हुए अपने नए गीत ‘कचौड़ी गली’ के जरिए रेखा भारद्वाज ने भोजपुरी लोक संगीत की जड़ों को फिर से सामने लाने की कोशिश की है। यह गीत कोक स्टूडियो भारत के तहत उत्कल उदित के साथ प्रस्तुत किया गया है। गीत में विरह, यादों और भावनात्मक जुड़ाव जैसे लोक जीवन से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है।
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रेखा का कहना है कि भोजपुरी संगीत को अक्सर उसकी वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से अलग करके पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, रिश्तों और लोकजीवन की गहरी अभिव्यक्ति है। इसलिए इसे अधिक सम्मान और गंभीरता से देखने की जरूरत है।

उन्होंने माना कि डिजिटल दौर में वायरल ट्रेंड और छोटे-छोटे म्यूजिक क्लिप्स का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे गीतों के लिए भी जगह है जो संस्कृति, संवेदनाओं और कहानी कहने की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। रेखा के अनुसार युवा पीढ़ी को क्षेत्रीय लोक कलाओं और भाषाई विरासत से जोड़ना समय की बड़ी जरूरत है।
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भोजपुरी लोक संगीत की परंपरा सदियों पुरानी रही है। बिरहा, कजरी, सोहर और अन्य लोक विधाओं ने न केवल पूर्वांचल बल्कि दुनिया के कई देशों में बसे भोजपुरी समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा है। संगीत प्रेमियों का मानना है कि रेखा भारद्वाज जैसी स्थापित कलाकारों की पहल भोजपुरी लोक संगीत को नई पहचान और सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


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