खेसारी लाल यादव की सफलता पर पाखी हेगड़े का बड़ा बयान, हीरो लायक बॉडी नहीं थी

Date:

पटना: भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की सफलता को लेकर अभिनेत्री पाखी हेगड़े ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने खेसारी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि आज जिस मुकाम पर वे हैं, वहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। पाखी के अनुसार, खेसारी की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है, जो हर युवा कलाकार को प्रेरित करती है।

शुरुआती दौर में नहीं थी कोई खास तैयारी
पाखी हेगड़े ने बताया कि जब खेसारी लाल यादव ने करीब 2010 के आसपास भोजपुरी इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब उनके पास न तो डांस की खास ट्रेनिंग थी और न ही एक्टिंग का कोई अनुभव। उनकी बॉडी फिटनेस भी उस स्तर की नहीं थी, जो एक हीरो के लिए जरूरी मानी जाती है। ऐसे में उन्हें शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करने के लिए उन्हें लगातार सीखना पड़ा और खुद को हर दिन बेहतर बनाना पड़ा।

लगातार मेहनत ने बदली किस्मत
पाखी के मुताबिक, खेसारी ने कभी भी अपनी कमजोरियों को हार का कारण नहीं बनने दिया। उन्होंने दिन-रात मेहनत की, डांस सीखा, एक्टिंग में सुधार किया और अपनी फिटनेस पर भी खास ध्यान दिया। उनकी लगन और सीखने की भूख ने उन्हें धीरे-धीरे एक बेहतरीन कलाकार बना दिया। पाखी ने कहा कि खेसारी का यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि अगर इंसान में मेहनत करने की इच्छा हो, तो वह किसी भी कमी को अपनी ताकत में बदल सकता है।

आज बन चुके हैं इंडस्ट्री के बड़े सितारे
आज खेसारी लाल यादव भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं। उनकी फिल्मों और गानों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिलता है। पाखी हेगड़े ने कहा कि खेसारी की सफलता केवल उनकी लोकप्रियता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष और समर्पण की जीत है। उनका यह सफर उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो बिना किसी खास बैकग्राउंड के अपने दम पर कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

शाही लीची, जो हर गर्मी में बिहार को महकाती है

शाही लीची के लिए मशहूर बिहार का मुजफ्फरपुर जिले...

अब बच्चे पढ़ेंगे भोजपुरी, मैथिली और बज्जिका की कविताएं

मुजफ्फरपुर में बच्चों को भोजपुरी, मैथिली, बज्जिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की कविताएं और गीत सिखाने के लिए 'बालपन की कविता पहल' की शुरुआत की गई है। पटना: बदलते शिक्षा...

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित इस बौद्ध स्तूप का इतिहास क्या है…

अंजली पांडेय की रिपोर्ट पूर्वी चंपारण: अक्सर बातचीत या...