गौनाहा (पश्चिम चंपारण) । फिल्म अभिनेता पद्मश्री मनोज बाजपेयी इन दिनों बिहार दौरे पर थे। वे भितिहरवा स्थित जीवन कौशल ट्रस्ट के आश्रम पहुंचे।
वहां विभिन्न गांव की बच्चियों को कौशल विकास के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण के संबंध में जानकारी ली। आश्रम में संचालित अन्य गतिविधियों का जायजा लेने के बाद ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
बालिकाओं की कौशल आधारित शिक्षा से ही ग्रामीण समाज का समग्र विकास संभव है। यह प्रयास समाज के पिछड़े वर्गों के लिए सराहनीय है। इस दौरान उन्होंने चरखा चलाया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी चरखे को आत्मनिर्भर, अहिंसा और शांति के प्रतीक मानते थे। चरखा चलाना मानसिक शांति, धैर्य और संयम विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। आश्रम परिसर में दो वर्ष पूर्व उनके द्वारा लगाए रुद्राक्ष पौधे का विकास देखकर काफी प्रसन्न हुए।
कहा कि सिर्फ पौधे लगाने की नहीं, उनके संरक्षण की भी आवश्यकता है। बेहतर संरक्षण का ही परिणाम है कि दो वर्ष में रुद्राक्ष का पौधा इतना बड़ा हो गया है।
इससे पूर्व अभिनेता ने डीएम तरनजोत सिंह और एसपी डॉ. शौर्य सुमन से मुलाकात कर चंपारण की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने के मुद्दे पर विशेष चर्चा की।
साथ ही ट्रस्ट की गतिविधियों और उनके प्रभाव पर भी बातचीत की।उनके साथ ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह, सचिव प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष राकेश राव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
गीता-राधाकांत बाजपेयी स्मृति पुस्तकालय का किया निरीक्षण
यात्रा क्रम में वे कस्तूरबा कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय भितिहरवा भी पहुंचे, जहां उनके माता-पिता की स्मृति में स्थापित गीता-राधाकांत बाजपेयी स्मृति पुस्तकालय का निरीक्षण किया।
यहां छात्राओं के लिए उपलब्ध कराई गई पुस्तकों व संसाधनों की जानकारी ली।छात्राओं से भी बातचीत की। उनकी शिक्षा को लेकर स्कूल में संचालित व्यवस्था के बारे में जाना।
विद्यालय के प्राचार्य सुधीष्ट कुमार ने उन्हें विद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया। अभिनेता ने कहा कि गांवों में इस तरह के प्रयास बदलाव की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं और महात्मा गांधी व कस्तूरबा गांधी के विचारों को गांव स्तर पर आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।

