आसरा सेवा केंद्र और पंचमेल फाउंडेशन के संयुक्त सौजन्य से आयोजन, सारण संग्रहालय में जुटेंगे भोजपुरी कला-संस्कृति से जुड़े प्रतिभागी
छपरा। भोजपुरी भाषा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छपरा में ‘भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला’ का आयोजन किया जा रहा है। आसरा सेवा केंद्र और पंचमेल फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यशाला 26 से 28 सितंबर 2026 तक सारण संग्रहालय, बस स्टैंड के समीप, छपरा, बिहार में आयोजित होगी।
कार्यशाला के मुख्य आयोजक प्रो. पृथ्वीराज सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर (सेवानिवृत्त), जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा हैं। आयोजन का उद्देश्य भोजपुरी अंचल की पारंपरिक चित्रकला, लोक-संस्कृति और कला परंपराओं को समझने, संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक रचनात्मक मंच उपलब्ध कराना है।
भोजपुरी लोककला को मिलेगा रचनात्मक मंच
भोजपुरी क्षेत्र की अपनी समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक परंपरा रही है। लोकगीत, लोककथाओं और पर्व-त्योहारों के साथ यहां चित्रकला की भी विविध परंपराएं देखने को मिलती हैं। बदलते समय में इन पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना बड़ी चुनौती है। ऐसे में चित्रकला कार्यशाला जैसे आयोजन कलाकारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों को एक साथ आने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला के माध्यम से भोजपुरी क्षेत्र की चित्रकला की परंपराओं और उनकी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही प्रतिभागियों को कला की विभिन्न बारीकियों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
सारण संग्रहालय में होगा आयोजन
कार्यशाला का आयोजन सारण संग्रहालय, छपरा में किया जा रहा है। संग्रहालय को आयोजन स्थल बनाए जाने से कला और स्थानीय विरासत के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर भी मिलेगा। आयोजन में भोजपुरी कला और संस्कृति से जुड़े लोगों की सहभागिता की उम्मीद है।
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कार्यक्रम के सहयोगी के रूप में सारण संग्रहालय (कला एवं संस्कृति विभाग) का उल्लेख किया गया है। आयोजकों ने कला, संस्कृति और भोजपुरी विरासत में रुचि रखने वाले लोगों से कार्यशाला में शामिल होने का आह्वान किया है।
Bhojpuri24.com के लिए एंगल
यह कार्यशाला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भोजपुरी भाषा के साथ-साथ उसकी लोककला, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण और संरक्षण की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। चित्रकला जैसी दृश्य कलाएं किसी भी समाज की स्मृतियों, लोकविश्वासों, प्रकृति और सामाजिक जीवन को अभिव्यक्त करने का प्रभावी माध्यम होती हैं।
तीन दिवसीय कार्यशाला से तैयार होने वाली कलाकृतियां और उसमें सामने आने वाली कला परंपराएं भोजपुरी सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए उपयोगी सामग्री बन सकती हैं। इससे स्थानीय कलाकारों और नई पीढ़ी के बीच संवाद का रास्ता भी खुल सकता है।
कार्यशाला: भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला
तारीख: 26–28 सितंबर 2026
स्थान: सारण संग्रहालय, बस स्टैंड के समीप, छपरा, बिहार
आयोजक: आसरा सेवा केंद्र एवं पंचमेल फाउंडेशन
सहयोग: सारण संग्रहालय, कला एवं संस्कृति विभाग




