रिसड़ा, कोलकाता : भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति आ लोकजीवन के वैश्विक मंच देवे के उद्देश्य से भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कोलकाता के ओर से 20 दिसंबर 2026 के रिसड़ा में आयोजित होखे जा रहल 13वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आ सम्मान समारोह के तइयारी के लेके एगो महत्वपूर्ण बइठक आयोजित भइल। बइठक में कार्यक्रम के रूपरेखा, अलग-अलग सत्र, अतिथिगण के स्वागत, सांस्कृतिक प्रस्तुति, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह आ संगठनात्मक दायित्व सभ पर विस्तार से विचार-विमर्श भइल।
बइठक में बतावल गइल कि एह अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में चीन, नेपाल, मारिशस आ अमेरिका समेत भारत के करीब 14 राज्यन से प्रोफेसर, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, साहित्यकार, आलोचक, कलाकार आ भाषाविद् शामिल होइहें। आयोजन में भोजपुरी भाषा के साहित्यिक आ सांस्कृतिक समृद्धि के साथे भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के मांग आ एहसे जुड़ल भाषायी विमर्श के प्रमुखता से उठावे के निर्णय लिहल गइल।
बइठक में मौजूद सदस्यगण कहलन कि भोजपुरी के व्यापक जनस्वीकृति, समृद्ध साहित्यिक परंपरा आ देश-विदेश में एह भाषा के करोड़ों भाषाभाषियन के सांस्कृतिक सक्रियता के देखत एह विषय पर गंभीर अकादमिक आ सामाजिक संवाद के जरूरत बा। कार्यक्रम के पाँचों सत्र के रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा भइल। पहिला सत्र “तुलनात्मक विश्व साहित्य आ भारतीय ज्ञान परंपरा” पर केंद्रित रही। एह सत्र में विश्व साहित्य के संदर्भ में भारतीय साहित्य आ ज्ञान परंपरा के विविध पक्षन पर विद्वान लोग आपन विचार रखिहें। दूसरा सत्र “भोजपुरी लोकगीतन में भारतीय जीवन मूल्य” विषय पर आधारित रही। तीसरा सत्र में भोजपुरी संस्कार केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कइल जाई आ पुस्तक में प्रकाशित कवियन के ओर से काव्य-पाठ होई। चौथा सत्र भोजपुरी के लोकसंस्कृति, संगीत आ नृत्य पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति के होई। अंतिम सत्र में सम्मान समारोह आ समापन आयोजित कइल जाई।
आयोजन के तइयारी के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. (डॉ.) विवेक मणि त्रिपाठी (चीन), मनीषा पाठक (अमेरिका), विजय किशोर पांडेय (नेपाल), डॉ. सुधाकर तिवारी (कुशीनगर) आ डॉ. सुशीला ओझा (पश्चिम चंपारण) से जुड़ल अलग-अलग दायित्व आ अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता पर चर्चा भइल। प्रवर समिति अध्यक्ष डॉ. विमलेश त्रिपाठी, दुर्गावती देवी आ डॉ. कालिंदी बृजेश कार्यक्रम के अकादमिक स्तर आ आयोजन के रूपरेखा के लेके जरूरी सुझाव दिहलें। बइठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी गिरि आयोजन के व्यापक जनभागीदारी से जोड़े आ देश के अलग-अलग क्षेत्र से आवे वाला साहित्यकारन आ विद्वानन के बीच समन्वय पर जोर दिहलें। उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, बी. एन. तिवारी, डॉ. शिप्रा मिश्रा, डॉ. रामानुज द्विवेदी, डॉ. उर्वशी श्रीवास्तव, उज्ज्वल कुमार पाण्डेय आ श्वेता गुप्ता ‘श्वेतांबरी’ से आयोजन के विभिन्न पक्षन के संबंध में विचार-विमर्श कइल गइल। प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार पाण्डेय कोलकाता आ पश्चिम बंगाल में होखे वाला आयोजन के स्थानीय तइयारी आ समन्वय के जानकारी दिहलें।
बइठक में राम बहादुर राय आ राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश प्रियांशु संगठनात्मक तइयारी आ विभिन्न राज्यन से आवे वाला प्रतिनिधियन के साथे समन्वय के स्थिति से अवगत करवलें। संयुक्त सचिव अपर्णा तिवारी, चंदना मंडल, भूमि श्रीवास्तव आ सुहानी शर्मा के कार्यक्रम से जुड़ल अलग-अलग व्यवस्था के समन्वय के जिम्मेदारी पर चर्चा भइल।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के लेके रतन ओझा, स्वाति भारद्वाज, मुस्कान तिवारी आ ज्योति दास से सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूपरेखा पर विचार-विमर्श भइल। कोषाध्यक्ष डॉ. रेखा त्रिपाठी आयोजन से जुड़ल वित्तीय आ जरूरी व्यवस्था के जानकारी दिहलीं। साहित्यिक सत्र के प्रभावी बनावे खातिर डॉ. गुड्डी सिंह (प्रबंध), प्रो. डॉ. नम्रता कुमारी (पटना), आदित्य त्रिपाठी, रिंकी तिवारी आ नीलम प्रसाद के साथे शोध-पत्र, काव्य-पाठ आ साहित्यिक प्रस्तुति से जुड़ल विषय पर चर्चा भइल। युवाध्यक्ष नीतीश सिंह युवा साहित्यकारन आ शोधार्थियन के अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करे के बात कहलें। ओहिजे मीडिया प्रभारी सह तकनीकी अभिषेक श्रीवास्तव (पटना) प्रचार-प्रसार, तकनीकी व्यवस्था आ डिजिटल माध्यम से कार्यक्रम के देश-विदेश तक पहुँचावे के तइयारी के जानकारी दिहलें। तुलनात्मक विश्व साहित्य अउर भारतीय ज्ञान परंपरा, भोजपुरी लोकगीतन में जीवन मूल्य, संस्कार आधारित नृत्य-नाटिका आ लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुति तक कार्यक्रम के व्यापक रूपरेखा तइयार कइल गइल बा।
बइठक के अंत में आयोजन के सफल बनावे खातिर अलग-अलग समिति आ पदाधिकारियन के बीच दायित्व के समन्वय, अतिथियन के स्वागत, आवास आ परिवहन, मंच व्यवस्था, साहित्यिक सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मीडिया प्रचार आ सम्मान समारोह के तइयारी समयबद्ध तरीका से पूरा करे पर सहमति बनल। उम्मीद बा कि 20 दिसंबर के रिसड़ा में होखे वाला ई आयोजन भोजपुरी भाषा, साहित्य आ संस्कृति के साथे-साथे ओकर संवैधानिक पहचान से जुड़ल विमर्श के भी एगो साझा अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करी।




