आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)। भोजपुरी भाषा, साहित्य, लोककला और संस्कृति को वैश्विक मंच देने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत का आयोजन इस वर्ष 4, 5 और 6 दिसंबर 2026 को किया जाएगा। आयोजन का संयोजन राष्ट्रीय कला सेवा संस्थान, आजमगढ़ की ओर से किया जा रहा है। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन एवं गौरवशाली पूर्वांचल सम्मान समारोह भी आयोजित होगा। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत के अंतरराष्ट्रीय संयोजक, अरविंद श्रीवास्तव “चित्रांश” ने दी है।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन पिछले करीब तीन दशकों से भारतीय लोक संस्कृति और भोजपुरी भाषा के क्षेत्र में चल रही सांस्कृतिक गतिविधियों की निरंतरता है। कार्यक्रम में भारत के साथ-साथ मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, नेपाल, भूटान, सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग, दुबई, आबू धाबी, लंदन और अमेरिका सहित विभिन्न देशों से साहित्यकारों, कलाकारों, रंगकर्मियों, गीतकारों, प्रोफेसरों, कवियों, फिल्म निर्देशक-निर्माताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
2002 में हुई थी शुरुआत
आयोजकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम की शुरुआत वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल आचार्य विष्णुकांत शास्त्री के हाथों आजमगढ़ से हुई थी। इसके बाद भोजपुरी भाषा और पूर्वांचल की लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार देश के विभिन्न हिस्सों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हुआ।

आयोजन से जुड़े अरविंद श्रीवास्तव ‘चित्रांश’ के अनुसार, पिछले वर्षों में मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, नेपाल, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, आबू धाबी, श्रीलंका, लंदन और अमेरिका सहित कई देशों में भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में सहभागिता हुई है।
लोकनाट्य से फिल्म तक का सफर
अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम से जुड़े सांस्कृतिक कार्यों में लोकनाट्य और साहित्य को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। आयोजकों के अनुसार, लेखक एवं निर्देशक के रूप में अरविंद श्रीवास्तव ‘चित्रांश’ की रचना ‘बिटिया की विदाई’ भारतीय लोक संस्कृति, श्रीराम के आदर्श, सीता के त्याग और भोजपुरी पारंपरिक संस्कार गीतों पर आधारित है। इस लोकनाट्य को अब फिल्म के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा ‘भोजपुरी फिल्मों से भोजपुरीवासियों का सरोकार’ पुस्तक के संपादन और लेखन तथा ‘गौरवशाली पूर्वांचल’ के प्रधान संपादक एवं प्रभारी के रूप में भी उन्होंने कार्य किया है।
‘गौरवशाली पूर्वांचल’ का होगा लोकार्पण
आयोजन के दौरान ‘गौरवशाली पूर्वांचल’ भाग-2 पुस्तक का लोकार्पण भी प्रस्तावित है। आयोजकों के अनुसार, पुस्तक में पूर्वांचल के सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक योगदान को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम में गौरवशाली पूर्वांचल सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी मुद्दा
अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम को भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग से जुड़े सांस्कृतिक प्रयासों के एक मंच के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि सम्मेलन के माध्यम से भोजपुरी भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक स्तर पर प्रसार के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। आयोजकों के मुताबिक, 22 और 23 दिसंबर 2025 को भी अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत का आयोजन किया गया था। अब वर्ष 2026 का आयोजन 4, 5 और 6 दिसंबर को प्रस्तावित है। आयोजन के अंतरराष्ट्रीय ऑर्गेनाइजर एवं लेखक-निर्देशक अरविंद श्रीवास्तव ‘चित्रांश’ हैं। वे अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत के अंतरराष्ट्रीय संयोजक तथा प्रधान संपादक एवं प्रभारी के रूप में भी जुड़े हैं। आयोजकों का कहना है कि सम्मेलन का उद्देश्य भोजपुरी भाषा, साहित्य, लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और भारतीय लोक संस्कृति को एक साझा अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।




