नई दिल्ली/पटना। बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे एक और सिनेमाई ताकत चुपके से दुनिया भर में अपनी जगह बना रही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं भोजपुरी सिनेमा यानी ‘भोजवुड’ की। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिट्टी से निकली यह फिल्म इंडस्ट्री अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। भोजपुरी सिनेमा की जड़ें 1960 के दशक में हैं, जब पहली फिल्म गंगा मइया तोहे पियरी चढ़ैबो (1962) रिलीज हुई थी। लेकिन असली उछाल 2000 के बाद आया। फिल्में जैसे ससुरा बड़ा पैसावाला (2003) और प्रतिज्ञा (2008) ने क्रमशः 35-35 करोड़ रुपये की वर्ल्डवाइड कमाई की, जो उस समय के हिसाब से जबरदस्त थी। आज भी ये फिल्में भोजपुरी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली लिस्ट में टॉप पर हैं।
आज की स्थिति और आंकड़े
वर्तमान में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री सालाना 70 से 100 फिल्में प्रोड्यूस करती है। इसका कुल बाजार मूल्य 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा अनुमानित है। लगभग 30 प्रतिशत राजस्व अब डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से आ रहा है। भोजपुरी गाने और म्यूजिक वीडियो आसानी से 300 मिलियन से ज्यादा व्यूज पार कर जाते हैं। यह इंडस्ट्री मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मुंबई के प्रवासी श्रमिकों पर निर्भर रही है, लेकिन अब इसका दायरा बहुत बढ़ गया है। भोजपुरी भाषा बोलने वाले करीब 25 करोड़ लोग दुनिया भर में हैं। इनमें से बड़ी संख्या कैरिबियन देशों (ट्रिनिडाड एंड टोबैगो, गयाना, सूरीनाम), फिजी, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड जैसे देशों में बस चुकी है। दूसरे और तीसरी पीढ़ी के प्रवासी भी अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए भोजपुरी फिल्में देखते हैं।
दुनिया भर में बढ़ रही है ऐसे धाक
भोजपुरी फिल्में इन देशों में थिएटरों में रिलीज होती हैं और अच्छी कमाई करती हैं। उदाहरण के लिए, कई फिल्में मॉरीशस, फिजी और सूरीनाम में खास तौर पर सफल रही हैं। डिजिटल युग में YouTube, OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया ने इसे और गति दी है। भोजपुरी सिनेमा अब सिर्फ ‘क्षेत्रीय’ नहीं, बल्कि ‘डायस्पोरा कनेक्ट’ का मजबूत माध्यम बन चुका है।
सुपरस्टार्स की ग्लोबल फैन फॉलोइंग
खेसारी लाल यादव, रवि किशन, निरहुआ और पवन सिंह जैसे सितारे भोजपुरी सिनेमा के चेहरे बन चुके हैं। इन अभिनेता-सिंगर अपनी एनर्जेटिक परफॉर्मेंस और गानों के जरिए न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी लाखों फैंस की भीड़ खींचते हैं। खेसारी लाल यादव को ‘ट्रेंडिंग स्टार’ कहा जाता है, जबकि पवन सिंह की ‘लॉलीपॉप लगेलू’ जैसी हिट्स ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। इनकी फिल्में और गाने विदेशी भोजपुरी समुदायों में खास लोकप्रिय हैं।
बॉलीवुड से तुलना
बॉलीवुड की तुलना में भोजवुड का बजट बहुत कम होता है, लेकिन रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट अक्सर बेहतर रहता है। जबकि बॉलीवुड बड़े बजट और ग्लोबल मार्केटिंग पर निर्भर करता है, भोजपुरी सिनेमा अपनी सांस्कृतिक जड़ों, सरल कहानियों, एक्शन-रोमांस और लोक गीतों के मिश्रण से सीधे दिल तक पहुंचता है। भारतीय सिनेमा में रीजनल सिनेमा अब कुल फिल्मों का 65 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दे रहा है, और भोजपुरी इसमें अपनी भूमिका निभा रहा है।
चुनौतियां और भविष्य
इस क्षेत्र में चुनौतियां भी बहुत हैं जैसे पायरेटी, बेहतर प्रोडक्शन क्वालिटी की जरूरत और मुख्यधारा के साथ ज्यादा इंटीग्रेशन। लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बढ़ती वैश्विक डायस्पोरा के साथ भोजवुड की ग्लोबल एंट्री तेज हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रोफेशनल मैनेजमेंट और बेहतर स्क्रिप्टिंग पर फोकस बढ़ा, तो यह इंडस्ट्री और बड़े पैमाने पर उछाल ले सकती है। भोजपुरी सिनेमा अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक ताकत का प्रतीक बन चुका है। बॉलीवुड की चमक में खोई हुई यह ‘भोजवुड’ धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान गढ़ रही है और दुनिया इसे नोटिस कर रही है।

