Tag: भोजपुरी साहित्य

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‘धधकत सुरुज पियासल धरती’,ईको पोएट्री आ ईको क्रिटिसिज्म के एगो नया आयाम

डॉ. संतोष पटेल ‘जोहार भोजपुरिया’ के संपादक आ कवि कनक किशोर के पर्यावरणीय कविता-संग्रह ‘धधकत सुरुज पियासल धरती’ आजु के समय में एगो बहुत जरूरी...

भोजपुरी लोक की वह बात, जो रहीम भी जानते थे और दोहे में कह गए

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी भोजपुरी साहित्य की असल शक्ति या ताकत या विशिष्टता क्या है? उसकी लोक-स्मृति। उसकी जड़ें लोक जीवन में हैं, जो पीढ़ियों...

खरकत जमीन, बजरत आसमान’, भोजपुरी कविता में प्रयोग और संवेदना का नया विस्तार

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी कविता का संसार अपनी लोक-स्मृति, जीवनानुभव, सहज कथन-शैली और मिट्टी से जुड़े सरोकारों के कारण विशिष्ट पहचान रखता...

‘बेकहल जिन्दगी’ भोजपुरी शब्द-संपदा में शास्त्रीय बहर की सधी हुई ग़ज़लें

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा नेपाल प्रवास के दौरान नेपाल के महाकवि गोपाल अश्क जी ने अपनी चार पुस्तकें सप्रेम भेंट की थीं। उनमें बेकहल...

‘माटी-पानी’ भोजपुरी अस्मिता, लोक-संस्कृति आ जीवन-बोध के जीवंत दस्तावेज

डॉ. संतोष पटेल पेशा से पत्रकार आ हृदय से लेखक भाई रितेश त्रिपाठी के निबंध संग्रह ‘माटी-पानी’ भोजपुरी वाङ्मय के एगो अनमोल धरोहर बा। ई...

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डॉ. संतोष पटेल: भोजपुरी खातिर संघर्षरत एगो मजबूत आवाज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर आज चर्चा अइसन व्यक्तित्व के, जवन भोजपुरी...

भोजपुरी-हिंदी के सशक्त नवगीतकार भगवती प्रसाद द्विवेदी

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल गीत भारतीय काव्य-परंपरा की सर्वाधिक प्राचीन...

भोजपुरी के सोहर में आजो जनमेलन बनवारी, नंद के लाला से मन के कन्हैया तक

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी कुछ दृश्य उम्र के साथ धुँधले...

भोजपुरी के हक पर संसद का ‘मानदंड’ वाला अड़ंगा, मान्यता के लिए लड़ाई जारी रहेगी

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने...

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