Tag: भोजपुरी साहित्य समीक्षा

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‘गोहार’ में गूंजत भोजपुरी समाज के पीड़ा, प्रेम आ प्रतिरोध के स्वर

डाॅ. सुनील कुमार पाठक भोजपुरी में गद्य से शुरुआत करिके पद्य के दुनियाँ में उतरे वाला हिन्दी-भोजपुरी के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार चंद्रेश्वर जी के पहिला भोजपुरी...

माटी के गंध, गाँव के पीड़ा आ लोकजीवन के सुर हऽ ‘चलऽ चलीं गँउवाँ के ओर’

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया भोजपुरी साहित्य के समृद्ध परंपरा में गीत विधा के अपना एगो विशिष्ट स्थान बा। लोकजीवन, माटी के गंध, रिश्तन के आत्मीयता, प्रकृति...

डॉ. जौहर साफियाबादी के भोजपुरी उपन्यास ‘पूर्वी के धाह’, एक गंभीर, विस्तृत एवं आलोचनात्मक समीक्षा

कृष्ण कुमार भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा में कुछ ऐसी कृतियाँ समय-समय पर सामने आती हैं, जो केवल साहित्यिक सृजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि...

‘धधकत सुरुज पियासल धरती’,ईको पोएट्री आ ईको क्रिटिसिज्म के एगो नया आयाम

डॉ. संतोष पटेल ‘जोहार भोजपुरिया’ के संपादक आ कवि कनक किशोर के पर्यावरणीय कविता-संग्रह ‘धधकत सुरुज पियासल धरती’ आजु के समय में एगो बहुत जरूरी...

खरकत जमीन, बजरत आसमान’, भोजपुरी कविता में प्रयोग और संवेदना का नया विस्तार

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी कविता का संसार अपनी लोक-स्मृति, जीवनानुभव, सहज कथन-शैली और मिट्टी से जुड़े सरोकारों के कारण विशिष्ट पहचान रखता...

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