गांव समाज

मॉरीशस में भोजपुरी का गला किसने घोंटा?

-डॉ.संतोष पटेल मॉरीशस में एक प्रचलित गीत है- 'अंगाजे रहल भईया, अंगाजे रहल भइया एक महिनवा में पांच गो रुपइया हो खाये के मोटका चाउर रहल खूबे लाल कोको...

1728 की ‘बारह मासी’ से शुरू हुई थी भोजपुरी साहित्य की शुरुआती लिखित परंपरा

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी भाषा का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुराना माना जाता है, लेकिन इसका लिखित रूप लंबे समय तक लोकगीतों, मौखिक परंपराओं और जनजीवन...

मां की दीवारों से शुरू हुआ सपना, जिसने भोजपुरी लोककला ‘पिड़िया’ को दिलाई वैश्विक पहचान

Bhojpuri24.com की विशेष ‘भोजपुरी धुरंधर’ श्रृंखला में आज पढ़िए पिड़िया लेखन की प्रतिष्ठित लोकचित्रकार विनीता कुमारी की प्रेरक कहानी। हाल ही में भोजपुर की...

भोजपुरी के नाम पर फैल रहे फूहड़पन के विरुद्ध छेड़ा अभियान है ‘लोकरंग’

अंतरराष्ट्रीय फलक पर लोकरंग की खुशबू, इसमें अब तक 1800 से अधिक लोक कलाकारों ने भाग लिया है तो गांव की महिलाओं ने परंपरागत...

जिनसे कहा गया था, ‘बेटी के पढ़ावल और बढ़ावल ठीक ना होला’, वही आज भोजपुरी की पहचान बन गईं

भोजपुरी धुरंधर: अश्लीलता के दौर में लोकसंस्कृति की मशाल बनीं मनीषा श्रीवास्तव, 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025' से सम्मानित किए जाने की घोषणा की...

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