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मां विंध्यवासिनी की स्तुति से हुई कजरी की शुरुआत, पहले खेली जाती थी, बाद में गाई जाने लगी

आचार्य हरेराम त्रिपाठी 'चेतन' से विशेष बातचीत सावन की पहली फुहार के साथ भोजपुरी अंचल में कजरी की गूंज सुनाई देने लगती है। लेकिन क्या...

भोजपुरी गीत-संगीत का संकट या बदलाव? अश्लील बनाम श्लील की नई बहस

डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह भोजपुरी की गीत परंपरा में प्रतिरोध, राग-विराग, संयोग-वियोग, संस्कार और जन सरोकारों की चेतना प्रवाहित होती रही है। वहीं इक्कीसवीं सदी...

कुक्कुर पर सिनेमा आ सिनेमा में कुक्कुर

मनोज भावुक कुक्कुर, कुत्ता, डॉग, टॉमी, डॉगी, शेरु जवन नाम से रउआ जानत होईं बाकिर सभका जिनगी में कुक्कुर होखबे करेले सन. हमरा जिनगी में...

भोजपुरी साहित्य के ‘मस्ताना’, जिन्होंने भाषा को दिया नया आयाम

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय उस साहित्य साधक का, जिन्होंने भोजपुरी भाषा को केवल लोकगीतों और लोकसंस्कृति तक सीमित नहीं...

भोजपुरिया जिनगी के सुख-दुख के मार्मिक आख्यान बा ‘झनकि बाजे हो

कनक किशोर सरल व्यक्तित्व के स्वामी बड़का आ गंभीर बात के बड़ा सहज ढंग से एह तरे सामने रखेला कि ऊ अपना जइसन, अपना जोरे...

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‘संविधान से दूर काहे भोजपुरी’: भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता के संघर्ष का वैचारिक दस्तावेज

समीक्षक : राजेश भोजपुरिया भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता, उसके...

जौहर से ‘सूफ़ी रत्न’ तक, दीवारों के पार, रूह की आवाज़

डॉ. जौहर शफ़ियाबादी के साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान पर...
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