Bhojpuri24 team

368 POSTS

Exclusive articles:

माटी के गंध, गाँव के पीड़ा आ लोकजीवन के सुर हऽ ‘चलऽ चलीं गँउवाँ के ओर’

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया भोजपुरी साहित्य के समृद्ध परंपरा में गीत विधा के अपना एगो विशिष्ट स्थान बा। लोकजीवन, माटी के गंध, रिश्तन के आत्मीयता, प्रकृति...

डॉ. जौहर साफियाबादी के भोजपुरी उपन्यास ‘पूर्वी के धाह’, एक गंभीर, विस्तृत एवं आलोचनात्मक समीक्षा

कृष्ण कुमार भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा में कुछ ऐसी कृतियाँ समय-समय पर सामने आती हैं, जो केवल साहित्यिक सृजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि...

‘धधकत सुरुज पियासल धरती’,ईको पोएट्री आ ईको क्रिटिसिज्म के एगो नया आयाम

डॉ. संतोष पटेल ‘जोहार भोजपुरिया’ के संपादक आ कवि कनक किशोर के पर्यावरणीय कविता-संग्रह ‘धधकत सुरुज पियासल धरती’ आजु के समय में एगो बहुत जरूरी...

भोजपुरी लोक की वह बात, जो रहीम भी जानते थे और दोहे में कह गए

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी भोजपुरी साहित्य की असल शक्ति या ताकत या विशिष्टता क्या है? उसकी लोक-स्मृति। उसकी जड़ें लोक जीवन में हैं, जो पीढ़ियों...

खरकत जमीन, बजरत आसमान’, भोजपुरी कविता में प्रयोग और संवेदना का नया विस्तार

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी कविता का संसार अपनी लोक-स्मृति, जीवनानुभव, सहज कथन-शैली और मिट्टी से जुड़े सरोकारों के कारण विशिष्ट पहचान रखता...

Breaking

जौहर से ‘सूफ़ी रत्न’ तक, दीवारों के पार, रूह की आवाज़

डॉ. जौहर शफ़ियाबादी के साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान पर...
spot_imgspot_img