भोजपुरी गीतों और भारतीय संस्कृति से पीएम मोदी का नीदरलैंड में पारंपरिक स्वागत, 153 साल पुराना रिश्ता फिर चर्चा में

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ए राजा जी, एकरे त रहल हा जरूर…नीदरलैंड में भोजपुरी गाने पर PM Modi का भव्‍य स्वागत, हर-हर महादेव के नारे से गूंजा हेग

द हेग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान वहां बसे भारतीय मूल के ‘सरनामी हिंदुस्तानी’ समुदाय ने खास आकर्षण बटोरा। द हेग में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भोजपुरी गीतों, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक स्वागत ने यह दिखाया कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद भारतीय जड़ें आज भी जीवित हैं।

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दरअसल, इस समुदाय की कहानी 153 साल पुरानी है। 5 जून 1873 को ‘लल्ला रूख’ नामक जहाज भारतीय मजदूरों को लेकर सूरीनाम पहुंचा था। इनमें अधिकांश लोग बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बंगाल के भोजपुरी भाषी इलाकों से गए थे। अंग्रेजों के समय इन्हें गिरमिटिया मजदूर के रूप में सूरीनाम भेजा गया था।

सूरीनाम की आजादी के बाद 1975 में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग नीदरलैंड आकर बस गए। आज नीदरलैंड में करीब दो लाख से अधिक सरनामी हिंदुस्तानी रहते हैं, जिन्हें यूरोप का सबसे बड़ा और पुराना भारतीय मूल समुदाय माना जाता है।

इस समुदाय की सबसे बड़ी पहचान उसकी भाषा और संस्कृति है। ‘सरनामी’ भाषा भोजपुरी, अवधी, मगही और डच प्रभावों से विकसित हुई है। द हेग की गलियों, मंदिरों और सामुदायिक आयोजनों में आज भी लोग सरनामी और भोजपुरी बोलते हैं।

नीदरलैंड में भारतीय संस्कृति का प्रभाव संगीत और साहित्य में भी दिखाई देता है। यहां की प्रसिद्ध ‘बैठक गाना’ परंपरा भोजपुरी लोकधुनों से विकसित हुई है। सरनामी-भोजपुरी संगीत को नई पहचान देने वाले कलाकार राज मोहन ने भारतीय गायक अनुप जलोटा के साथ भी काम किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में भारतीय समुदाय ने कथक, गरबा और भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां अपनी संस्कृति, मेहनत और मूल्यों से अलग पहचान बनाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरनामी हिंदुस्तानी समुदाय भारतीय प्रवासी इतिहास का एक अनूठा अध्याय है, जिसने दो महाद्वीपों और कई पीढ़ियों के बाद भी अपनी भाषा, परंपरा और भारतीय पहचान को जीवित रखा है।

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