Bhojpuri24 team

370 POSTS

Exclusive articles:

1728 की ‘बारह मासी’ से शुरू हुई थी भोजपुरी साहित्य की शुरुआती लिखित परंपरा

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी भाषा का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुराना माना जाता है, लेकिन इसका लिखित रूप लंबे समय तक लोकगीतों, मौखिक परंपराओं और जनजीवन...

गिरमिटिया मजदूरों की मार्मिक गाथा, कुली-जहाजी भाइयों का दर्द, संघर्ष और 18 लाख लोगों की प्रवास यात्रा

19वीं और 20वीं सदी का समय भारतीय इतिहास का वह अध्याय है, जब लाखों लोगों को 'गिरमिटिया मजदूर' बनाकर दुनिया के अलग-अलग देशों में...

भोजपुरी साहित्य के संत रामनाथ पांडेय ‘बिंदिया’ से ‘महेन्दर मिसिर’ तक एक युगपुरुष की रचनात्मक यात्रा

भोजपुरी साहित्य के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने इस भाषा को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे साहित्यिक गरिमा...

भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता का विरोध, संकीर्ण मानसिकता का परिचायक

संतोष पटेल, संस्थापक, भोजपुरी जनजागरण अभियान 'बोलियाँ को भाषा बनाने की जिद' शीर्षक आलेख में मुंम्बई विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ करुणाशंकर उपाध्याय ने भोजपुरी...

भोजपुरी हास्य-व्यंग्य को नई पहचान देने वाले ‘चतुरी चाचा’ आज भी हैं प्रासंगिक

डॉ. मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' जयंती विशेष- 1 जुलाई 1927  भोजपुरी भाषा और साहित्य के इतिहास में डॉ. मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' का नाम अत्यंत सम्मान और...

Breaking

‘संविधान से दूर काहे भोजपुरी’: भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता के संघर्ष का वैचारिक दस्तावेज

समीक्षक : राजेश भोजपुरिया भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता, उसके...

जौहर से ‘सूफ़ी रत्न’ तक, दीवारों के पार, रूह की आवाज़

डॉ. जौहर शफ़ियाबादी के साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान पर...
spot_imgspot_img