बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के भोजपुरी एमए पाठ्यक्रम में शामिल होगी चंद्रेश्वर की कृति ‘हमार गाँव’

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नए सत्र 2026-27 से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में पढ़ेंगे विद्यार्थी, भोजपुरी कथेतर गद्य और ग्रामीण संस्कृति को मिली अकादमिक पहचान

भोजपुरी24 डेस्क। भोजपुरी साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में साहित्यकार चंद्रेश्वर की कथेतर गद्यकृति ‘हमार गाँव’ को बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के भोजपुरी स्नातकोत्तर (एमए) पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विद्यार्थी इस कृति का अध्ययन करेंगे। इसे भोजपुरी कथेतर गद्य और ग्रामीण जीवन-संस्कृति को अकादमिक स्तर पर पहचान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

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चंद्रेश्वर ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘हमार गाँव’ का पाठ्यक्रम में शामिल होना केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भोजपुरी कथेतर गद्य विधा और गाँव-घर की संस्कृति की स्वीकृति भी है। उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, भोजपुरी विभागों के विद्वानों और पाठ्यक्रम समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

सात संस्मरणों में गाँव की संस्कृति का चित्रण

‘हमार गाँव’ भोजपुरी की कथेतर गद्यकृति है, जिसमें सात संस्मरणों के माध्यम से गाँव के जीवन, परिवेश और सांस्कृतिक जड़ों को अभिव्यक्ति दी गई है। इस कृति के पाठ्यक्रम में शामिल होने से विद्यार्थियों को भोजपुरी समाज के ग्रामीण जीवन और उसकी सांस्कृतिक विरासत को साहित्यिक दृष्टि से समझने का अवसर मिलेगा।

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चंद्रेश्वर ने उम्मीद जताई कि पुस्तक में शामिल सात संस्मरण नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करेंगे। उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आशा पड़री गाँव की धूल से लेकर लखनऊ तक की उनकी यात्रा अब सार्थक होती दिखाई दे रही है।

भोजपुरी साहित्य के लिए महत्वपूर्ण कदम

भोजपुरी साहित्य में लोकजीवन, ग्रामीण समाज, परंपराओं और सांस्कृतिक अनुभवों को दर्ज करने वाली कथेतर गद्य विधा का विशेष महत्व है। ‘हमार गाँव’ को विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में स्थान मिलने से इस विधा के अध्ययन और विमर्श को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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यह पहल भोजपुरी भाषा और साहित्य को उच्च शिक्षा में अधिक प्रभावी स्थान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इससे विद्यार्थियों को अपनी भाषा, समाज और सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए स्थानीय अनुभवों पर आधारित साहित्य पढ़ने का अवसर मिलेगा।

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