‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’, बाढ़ की त्रासदी के बीच आस्था और उम्मीद की आवाज

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अक्षरा सिंह की आवाज में रिलीज हुआ गीत, मनोज भावुक के शब्द और मधुकर आनंद का संगीत

मुंबई, 6 अक्टूबर 2026। बिहार में बाढ़ की त्रासदी के बीच आम लोगों की पीड़ा, बेबसी और छठी मइया के प्रति अटूट आस्था को आवाज देता भोजपुरी गीत ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’ रिलीज हो गया है। लोकप्रिय अभिनेत्री-गायिका अक्षरा सिंह की भावपूर्ण आवाज में प्रस्तुत यह गीत बाढ़ से जूझ रहे बिहार की परिस्थितियों को लोक आस्था, प्रार्थना और उम्मीद से जोड़ता है।

गीतकार मनोज भावुक ने बाढ़ की विभीषिका के बीच घर-परिवार, खेत-खलिहान और आम जनजीवन की पीड़ा को सहज और मार्मिक शब्दों में पिरोया है। संकट की इस घड़ी में देवी-देवताओं, विशेषकर दुर्गा मइया और छठी मइया से बिहार की नैया पार लगाने की पुकार गीत का केंद्रीय भाव है। गीत में आपदा के दर्द के साथ-साथ मुश्किल वक्त में आस्था और भरोसे की ताकत भी महसूस होती है।

गीत सुनें:

संगीतकार मधुकर आनंद ने गीत की संवेदना के अनुरूप करुणा, प्रार्थना और उम्मीद से भरा संगीत तैयार किया है। मनोज भावुक के संवेदनशील शब्दों और मधुकर आनंद के भावप्रधान संगीत को अक्षरा सिंह की सशक्त गायकी ने प्रभावी स्वर दिया है। गीत सुनने वाले श्रोताओं को इसमें बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों की पीड़ा और लोक आस्था की गहरी झलक मिलती है।

बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंच चुकी हैं अक्षरा सिंह

अक्षरा सिंह की इस प्रस्तुति को इसलिए भी खास माना जा रहा है कि बाढ़ के दौरान वह खुद बिहार पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटी थीं। लोगों की तकलीफ को करीब से महसूस करने वाली अक्षरा की आवाज में इस गीत की पीड़ा और प्रार्थना स्वाभाविक रूप से और गहरी हो गई है। अपनी कला के साथ मानवीय संवेदना के लिए भी पहचानी जाने वाली अक्षरा ने इस गीत को सिर्फ गाया नहीं, बल्कि इसके भाव को आत्मीयता के साथ महसूस किया है।

मनोज भावुक के गीतों में सामाजिक सरोकार

सुप्रसिद्ध कवि और गीतकार मनोज भावुक इससे पहले भी ‘पलायन के दर्द, सुनऽ ए छठी मइया’ और ‘जागे यूपी-बिहार’ जैसे छठ गीतों के जरिए प्रवास, पलायन और बिहार के सामाजिक सरोकारों को स्वर दे चुके हैं।

इसी संवेदनशील रचनात्मक यात्रा की अगली कड़ी है हारमोनिया रिकॉर्ड्स से रिलीज हुआ ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’। गीत में आपदा का दर्द, लोकजीवन की संवेदना और विपत्ति के बीच उम्मीद व आस्था का विश्वास एक साथ सुनाई देता है।

गीत: बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार
गायिका: अक्षरा सिंह
गीतकार: मनोज भावुक
संगीत: मधुकर आनंद
लेबल: हारमोनिया रिकॉर्ड्स

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