कार्तिक मास 2026: 27 अक्टूबर से शुरू होंगे व्रत-त्योहार, 8 नवंबर को दीपावली और 15 नवंबर को डाला छठ

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कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा पर्वों का सिलसिला; जानिए करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, छठ पूजा और देव दीपावली की प्रमुख तिथियां

Bhojpuri24.com | धर्म-संस्कृति: ज्योतिषाचार्य शशांक शास्त्री

नई दिल्ली/पटना। हिंदू धर्म में पवित्र माने जाने वाले कार्तिक मास की शुरुआत मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 से हो रही है। इस महीने में करवा चौथ, अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, लोक आस्था का महापर्व छठ और देव दीपावली जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। कार्तिक मास का समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ होगा।

कार्तिक मास में स्नान, दान, दीपदान, भगवान विष्णु की आराधना और तुलसी पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले भोजपुरी समाज के लिए यह महीना धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपराओं और लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा है।

कार्तिक मास के प्रमुख व्रत एवं त्योहारों की तिथियां

  • 27 अक्टूबर, मंगलवार: कार्तिक मासारंभ और कार्तिक व्रत की शुरुआत।
  • 29 अक्टूबर, गुरुवार: करवा चौथ और संकष्टी गणेश चतुर्थी।
  • 1 नवंबर, रविवार: अहोई अष्टमी।
  • 5 नवंबर, गुरुवार: रमा एकादशी।
  • 6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस, धन्वंतरि जयंती और प्रदोष व्रत।
  • 7 नवंबर, शनिवार: मासिक शिवरात्रि।
  • 8 नवंबर, रविवार: दीपावली और लक्ष्मी-गणेश पूजन।
  • 9 नवंबर, सोमवार: कार्तिक अमावस्या और स्नान-दान।
  • 10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा।
  • 11 नवंबर, बुधवार: भैया दूज।
  • 13 नवंबर, शुक्रवार: छठ महापर्व की शुरुआत—नहाय-खाय।
  • 14 नवंबर, शनिवार: खरना।
  • 15 नवंबर, रविवार: डाला छठ और संध्या अर्घ्य।
  • 16 नवंबर, सोमवार: उषा अर्घ्य और छठ व्रत का पारण।
  • 18 नवंबर, बुधवार: अक्षय नवमी।
  • 20 नवंबर, शुक्रवार: देवउठनी एकादशी।
  • 21 नवंबर, शनिवार: तुलसी विवाह और एकादशी पारण से जुड़े अनुष्ठान।
  • 22 नवंबर, रविवार: प्रदोष व्रत।
  • 24 नवंबर, मंगलवार: कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली।

दीपावली और धनतेरस पर विशेष पूजन

धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की परंपरा है। दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीप प्रज्ज्वलन और सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।

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पूजा के शुभ मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए पूजा का समय तय करने से पहले अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग से पुष्टि करना उचित होगा।

छठ महापर्व: 13 से 16 नवंबर तक आस्था का उत्सव

भोजपुरी समाज के सबसे महत्वपूर्ण लोकपर्वों में शामिल छठ पूजा नवंबर में चार दिनों तक चलेगी। यह पर्व सूर्यदेव और छठी मइया की उपासना को समर्पित है। व्रती परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की मंगलकामना और आरोग्य के लिए कठिन नियमों के साथ व्रत रखते हैं।

छठ पूजा का चार दिवसीय कार्यक्रम

  1. 13 नवंबर, शुक्रवार—नहाय-खाय: स्नान और सात्त्विक भोजन के साथ व्रत की शुरुआत।
  2. 14 नवंबर, शनिवार—खरना: दिनभर उपवास के बाद शाम को प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
  3. 15 नवंबर, रविवार—संध्या अर्घ्य: अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
  4. 16 नवंबर, सोमवार—उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण होगा।

छठ के दौरान घाटों पर पारंपरिक गीतों की गूंज, सूप में सजाए गए फल और ठेकुआ का प्रसाद भोजपुरी लोक संस्कृति की विशिष्ट पहचान को जीवंत करते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पर होगा देव दीपावली का आयोजन

24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और दीपदान की परंपरा है। वाराणसी सहित अनेक स्थानों पर देव दीपावली का आयोजन होता है। श्रद्धालु मंदिरों, घाटों और घरों में दीप जलाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

आस्था और लोक परंपरा का विशेष महीना

कार्तिक मास केवल धार्मिक व्रतों और पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, पारिवारिक एकजुटता और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का भी अवसर है। खासकर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में इस महीने का सांस्कृतिक महत्व बेहद व्यापक है।

नोट: पर्वों की तिथियां सामान्य भारतीय पंचांग संदर्भ के अनुसार दी गई हैं। स्थानीय परंपरा, क्षेत्र और पंचांग के अनुसार कुछ तिथियों या पूजा-मुहूर्तों में अंतर संभव है। प्रकाशन से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

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